पट्टा और रजिस्ट्री में क्या अंतर है

पट्टा और रजिस्ट्री में क्या अंतर है -दोस्तों आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्यम से बताएंगे कि रजिस्ट्री और पट्टे में क्या अंतर होता है। यदि आप भी रजिस्ट्री और पट्टे में अंतर जानना चाहते हैं तो आप हमारी इस पोस्ट को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़ें। हम आपको अपनी इस पोस्ट के माध्यम से रजिस्ट्री और पट्टे में अंतर बड़ी ही सरल भाषा में बताने जा रहे हैं। तो दोस्तों आप से निवेदन है कि आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

पट्टा और रजिस्ट्री में क्या अंतर है

दोस्तों यदि आप किसी की जमीन को खरीदते हैं तो आप उस जमीन का वास्तविक मूल्य चुका कर उस जमीन की रजिस्ट्री करवाते हैं। लेकिन पट्टे में हम केवल निर्धारित मूल्य चुकाकर तय समय सीमा के अनुसार ही उसका उपयोग कर सकते हैं। दोस्तों आज के समय में ज्यादातर लोगों को रजिस्ट्री और पट्टे में अंतर नहीं मालूम होता है। इसलिए वह कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। सरकार द्वारा नई नई योजना के अनुसार लोगों को पट्टा दिया जाता है। सरकार द्वारा दिए गए पट्टे के तहत सरकार भूमिहीन परिवारों की थोड़ी सहायता प्रदान करती  है। दोस्तों आपको बता दें कि पट्टे कई प्रकार के होते हैं , जिसकी अवधि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होती है।

What is the difference between Registry and Lease

इस टेबल के माध्यम से हम आपको रजिस्ट्री और पट्टा में अंतर बताने जा रहे है। यदि आप भी रजिस्ट्री और पट्टे में अंतर जानना चाहते हैं तो कृपया करके नीचे दी गई टेबल को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

क्रमांक                   रजिस्ट्री                                  पट्टा
1. रजिस्ट्री अथवा क्रय शब्द का मतलब होता है किसी जमीन के लिए उस जमीन के मूल्य का भुगतान कर परिसंपत्ति को खरीदना है। पट्टा अथवा लीजिंग का मतलब होता है किसी परिसंपत्ति को निर्धारित शुल्क देकर तय समय सीमा के अनुसार उपयोग कर उसे अनुमति देना।
2. रजिस्ट्री में विक्रेता और खरीददार दोनों लोगों को शामिल किया जाता है। इसके साथ ही रजिस्ट्री में गवाह की भी आवश्यकता होती है। पट्टा में लेसर और पट्टा लेने वाले ही व्यक्तियों को शामिल किया जाता है। इसके अंतर्गत किसी अन्य को शामिल नहीं किया जाता है
3. इस रजिस्ट्री के लिए व्यक्ति को जमीन का मालिक बनने के लिए लागत देनी पड़ती है। इस इस पट्टा में आप किसी की भी परिसंपत्ति को उपयोग करने के लिए उस परिसंपत्ति की लागत देनी पड़ती है।
4. रजिस्ट्री होने पर क्रेता को अपनी संपत्ति ट्रांसफर या फिर बेचने का अधिकार मिलता है। इसके अंतर्गत पत्तेदार किसी अन्य व्यक्ति को ना ही संपत्ति बेच सकता है और ना ही ट्रांसफर कर सकता है। इसमें यह सुविधा नहीं दिया दिया।
5. रजिस्ट्री होने पर मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी खरीदार की होती है। इसके अंतर्गत यह सुविधा व्यक्ति को पट्टे के प्रकार पर निर्भर करती है।
6. रजिस्ट्री होने पर में खरीदार को परिसंपत्ति के अवशिष्ट मूल्य का आनंद मिलता है। इसके अंतर्गत पट्टेदार संपत्ति के अवशिष्ट मूल्य से वंचित रहता है।
7. इसके अंतर्गत व्यक्ति संपत्ति का सभी बकाया मूल चुका कर उसके बाद  संपत्ति केवल खरीदार की हो जाती है। इसके अंतर्गत व्यक्ति को तय समय सीमा के अनुसार फिर से उसे निर्धारित प्रक्रिया के साथ पटा लेना पड़ता है यहां पर उसका नवीनीकरण करवाना पड़ता है।
8. इसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी रजिस्ट्री को रजिस्ट्री सम्बंधित रजिस्ट्रार कार्यालय में करा सकता है। सरकार द्वारा तय  मापदंडों एवं शर्तों के अनुसार पट्टा स्थानीय निकाय द्वारा जारी किया जाता है।
9. रजिस्ट्री होने के बाद क्रेता हमेशा के लिए उस जमीन का मालिकबन जाता है। पट्टा सरकार द्वारा तय नियमों के अलग-अलग प्रकार पर निर्भर करता है।
10 रजिस्ट्री कराने के लिए व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित उस जमीन की सरकारी रेट पर शुल्क देनी पड़ती है। इसके अंतर्गत व्यक्ति को सरकार द्वारा या स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित शुल्क एवं निर्धारित मापदंड को पूरा करना पड़ता है।

note ;- तो दोस्तों ऊपर हमने आपको रजिस्ट्री और पट्टे में क्या अंतर है, इन सभी की जानकारी चार्ट के माध्यम से बता दी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि रजिस्ट्री होने के बाद किसी परिसंपत्ति का मालिक बन जाता है। लेकिन आप पट्टा निर्धारित मूल्य चुकाने के बाद किसी परिसंपत्ति का केवल उपयोग कर सकते हैं।

निष्कर्ष

तो दोस्तों हमने आपको अपनी इस पोस्ट के माध्यम से रजिस्ट्री और पत्ता में क्या अंतर होता है के बारे में बता दिया है। यदि आपको अभी भी कोई समस्या आ रही है तो आप कृपया करके नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी समस्या लिखकर पूछ सकते हैं। हम आपकी हर प्रकार की सहायता करने के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगे। धन्यवाद

 

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